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कवि कि जान होती है कविता (पिंकी)


विधा– कविता
शीर्षक – “कवि कि जान होती हैं कविता….
कवि कि जान होती हैं कविता
सपनों कि उड़ान होती हैं कविता
सुबह कि पहली भोर हैं कवि
सूरज कि रौशनी सी होती हैं, कविता
कवि कि जान होती हैं कविता…..
परिंदा हैं कवि तो
परों कि पहेली उड़ान हैं कविता
कवि शरीर हैं तो
प्राण होती हैं कविता,
कवि कि जान होती हैं कविता…
सागर सा गहरा हैं कवि तो
मन का उड़फान होती हैं कविता
कवि वृक्ष हैं तो
शाखाएं होती हैं कविता,
कवि कि जान होती हैं कविता….
कवि हैं कलम तो
उसकी स्याही होती हैं कविता
.कवि प्रेम हैं तो
इसकी गहराई होती हैं कविता,
कवि कि जान होती हैं कविता…
पिंकी देवांगन
जांजगीर छत्तीसगढ़।
