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ऑपरेशन सिंदूर (पिंकी देवांगन)

“ऑपरेशन सिंदूर”
विधा – कविता
जब –जब देश ने पुकारा,
अपने बेटों को,
तब – तब हजारों मांगे, सुनी हुईं।
फिर भी हमेशा आगे बढ़ते रहे,
वीर जवानो कुर्बान होते रहे।
हौसलों कि उड़ान पर,
शत्रुओं को परस्त किया।
शहीदों कि बलिदानी रंग लायी हुमानी
कुछ छोड़ गये मुँह मोड़ गये,
देश सेवा का भाग्य जोड़ गये।
ये हैं देश के अभिमान सपूत ,
निज प्राण की आहुति दे गये।
दिखा दिया दुश्मनों को नहीं लक्ष्य से दूर
जो कायरता दिखाई तुमने
उसका जवाब दिया भरपूर।
जब भी गुंजी वन्दे मातरम कि धुन
तब वीर जवानों कि हौसले और बढ़े
भारत माता कि स्वाभिमान के लिए
रच दिया “ऑपरेशन सिंदूर”
जिसने बढ़ाया मान “राष्ट्रीय ध्वज” का।
हमें गर्व हैं अपने शौर्य वीरों पर
एक बार फिर पाराक्रम कर दिखाया
जिसे नाम दिया “ऑपरेशन सिंदूर”!!
जय हिन्द, जय भारत!!
पिंकी देवांगन
जांजगीर छत्तीसगढ़।

